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हिंदी महोत्सव - कोरोना के कारण स्कूली शिक्षा पर सकारात्मक और नकारात्मक प्रभाव

नमस्कार !! 21वी सदी को आने वाले समय में पूरे विश्व में कोरोना काल के नाम से जाना जाएगा। आज पूरा विश्व कोरोना की गिरफ्त में आ चुका है। कोई भी देश को रोना से अछूता नहीं है कोरोना ने यह साबित कर दिया है कि अगर कोई प्रकृति के साथ खेल खेलेगा तो जो कर दी थी उसके साथ वैसा ही खेल खेलेगी ।अपने आप को शक्तिशाली और विकसित समझने वाले देश भी इस कोरोना के आगे नतमस्तक हैं और उनके वैज्ञानिक भी असहाय पढ़ चुके हैं। पूरे विश्व की आर्थिक व्यवस्था राजनीतिक व्यवस्था और शैक्षणिक व्यवस्था इस कोरोना के कारण चरमरा गई है। शिक्षा से ही पूरा परिवार पूरा देश और यहां तक कि पूरा विश्व चमकता है और आज इस कोरोना नहीं शिक्षा की चकमकाहट को कम कर दिया है। कोरोना का भारतीय शिक्षा पर सकारात्मक और नकारात्मक प्रभाव पड़ता दिखाई दे रहा है और आज मैं इसी सकारात्मक और नकारात्मक प्रभाव के ऊपर बात करने जा रहा हूँ। सबसे पूर्व में कोरोना के कारण स्कूली शिक्षा पर हुए सकारात्मक प्रभाव के बारे में बात करूंगा। कोरोना का भारत देश में आने के बाद 10 अप्रैल को भारतीय सरकार ने भारत पड़े ऑनलाइन नामक एक योजना की शुरुआत की किसी भी छात्र और छात्रा ने यह नहीं सोचा था कि कोरोना उनको साल तक घर के अंदर रहने के लिए मजबूर कर देगा उन्होंने तो सोचा था कि यह सिर्फ तीन चार महीनों में खत्म हो जाएगा और वह फिर से स्कूल जाना शुरु कर देंगे परंतु ऐसा नहीं हुआ और इसी को देखते हुए स्कूलों ने ऑनलाइन कक्षा की शुरुआत की जिसके सकारात्मक प्रभाव हैं और वह आज मैं आपको बताने जा रहा हूं जो कि इस प्रकार हैं करो ना के कारण पूरी पढ़ाई मोबाइल फोन पर सीमित हो गई है जिस कारण कागज और पेन की बचत होती हैं और कागज की वजह होने पर पेड़ों की कटाई कम होती है जिससे पेड़ कटने से बचते हैं और वातावरण स्वच्छ होता है ।दूसरा सकारात्मक प्रभाव यह है कि हमें ऑनलाइन कक्षा अपने घर बैठ कर अपने मोबाइल फोन पर ही लगानी होती हैं इसके लिए हमें कहीं बाहर जाने की आवश्यकता नहीं होती जिससे कि पेट्रोल की या डीजल की बचत होती है और वाहन को भी हमें प्रयोग नहीं करना पड़ता जिसके चलते प्रदूषण कम होता है और वातावरण में ताजी हवा फैल जाती हैं बजाय की प्रदूषित हवा के ।और ऐसे और भी सकारात्मक प्रभाव ऑनलाइन कक्षा के हैं ।तो आइए हम जानते हैं ऑनलाइन शिक्षा के या फिर कोरोना के स्कूली बच्चों पर नकारात्मक प्रभाव के बारे में। शुरु शुरु में तो ऑनलाइन कक्षा में बच्चों को लुभाने की बहुत कोशिश की और बेस में सफल भी रहे परंतु अब धीरे-धीरे बच्चे इसे परेशान होने लगे हैं और उनके परिवार वाले भी इससे तंग होने लगे हैं छोटे-छोटे बच्चों को और मासूम बच्चों को सारा दिन फोन पर चिपका रहना पड़ता है जिससे उनकी सेहत पर भी असर हुआ है। घंटो तक ऑनलाइन क्लास लगाने की वजह से उनकी आंखें खराब होने लगी हैं क्योंकि ऑनलाइन कक्षा मोबाइल पर लगाई जाती है जिससे कि सारा दिन घंटो घंटो वह मोबाइल पर लगे रहते हैं और उनकी आंखों की रोशनी प्रभावित होती हैं। यहां तक कि कई बच्चों को तो आंखों की गंभीर बीमारियों से जूझना पड़ रहा है ऑनलाइन कक्षा कक्षीय शिक्षा की तरह बच्चों का मानसिक विकास नहीं करती जिससे कि भारतीय पारंपरिक कक्षीय शिक्षा ही प्रथम स्थान पर बच्चों के नजरिए में है। जिन क्षेत्रों में नेटवर्क की कमी है वहां पर बच्चों को ऑनलाइन कक्षा लगाने में खासी दिक्कत का सामना करना पड़ता है जिससे उनके पढ़ाई का समय बर्बाद होता है और अगर हम गरीब बच्चों की बात करें तो स्मार्टफोन का अभाव और डाटा की कमी के कारण वह ऑनलाइन कक्षा नहीं लगा पाते और वह शिक्षा से अछूते रह जाते हैं। और अश्वनी को नकारात्मक प्रभाव को रोना ने स्कूली शिक्षा पर दी हैं आशा है कि आपको मेरा लेख पसंद आएगा धन्यवाद!!